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RJD सांसद तस्लीमुद्दीन का चेन्नई के अपोलो अस्पताल में निधन, सीएम नितीश, RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद राबड़ी, मीसा, तेजस्वी, तेजप्रताप ने जताया शोक…

अररिया से आरजेडी सांसद मोहम्मद तस्लीमुद्दीन का आज रविवार को चेन्नई में निधन हो गया।बताया जा रहा है कि उनका निधन चेन्नई के अपोलो अस्पताल में हुआ।सांसद तस्लीमुद्दीन लंबे समय से राजद से जुड़े हुए थे।राजद के बड़े नेता माने जाते थे।तस्लीमुद्दीन अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते थे।मालूम हो कि तस्लीमुद्दीन एक सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने चेन्नई गए थे।जहां वे अचानक बीमार हो गए।उन्हें तुरंत चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी।तसलीमुद्दीन चेन्नई के अपोलो अस्पताल में काफी दिनों से भर्ती थे और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राजद सांसद तस्लीमुद्दीन को सांस लेने में तकलीफ और खांसी में खून आने की शिकायत थी। इधर तस्लीमुद्दीन ने के निधन के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारे

में शोक का माहौल है। उनके निधन पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री राबरी देवी,एक्स डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने शोक जताया है।इधर एलजेपी अध्यक्ष रामविलास पासवान ने भी शोक जताया है। इधर सीएम नीतीश कुमार ने भी

राजद सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन पर शोक जताया है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि तस्लीमुद्दीन का निधन बिहार की सियासत के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। साथ ही उन्होंने उनकी आत्मा की शांति की भी बात कही। आपको मालुम हो की प्रमंडल के अस्तित्व में आने से पहले पूर्णिया क्षेत्र को सीमांचल का नाम देकर सांसद मो.तस्लीमुद्दीन ने विकास के लिए जो लड़ाई छेड़ी, आज उस लड़ाई को कई मुकाम देकर उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वे अंतिम सांस तक सीमांचल के विकास के लिए आवाज 

बुलंद करते रहे।जिंदगी के आखिरी वक्त में भी बाढ़ को लेकर सीमांचल की उपेक्षा पर वे सरकार पर बरसते रहे।पिछले 23 अगस्त को वे अंतिम बार किशनगंज के दौरे पर आए थे।बाढ़ की त्रसदी से काफी व्यथित मो.तस्लीमुद्दीन जब मीडिया से रूबरू हुए तो उनकी बस यही रट थी कि अगर महानंदा तटबंध परियोजना साकार हो गई होती तो आज इतनी बड़ी तबाही नहीं होती।वे बार-बार सरकार से सवाल कर रहे थे कि योजना मंजूर हुई, पैसे मिल गए, फिर क्यों नहीं तटबंध बन पाया।सरकार पर बरसते हुए उन्होंने यहां तक

कह दिया था कि यह बाढ़ आई नहीं बल्कि लाई गई है। खैर, सीमांचल की उपेक्षा को लेकर हमेशा मुखर रहे जन नेता मो.तस्लीमुद्दीन तो अब नहीं रहे मगर, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि तभी मानी जाएगी जब राज्य सरकार की ओर से महानंदा तटबंध परियोजना पूरी कर ली जाएगी।सात साल से अधर में है महानदां तटबंध परियोजना आपको बताते चले की सीमांचल की शोक महांनदा और उसकी सहायक नदियों को जोड़ने और उसपर तटबंध बनाने के लिए सांसद मो. तस्लीमुद्दीन ने दिल्ली-पटना एक कर दिया था। आखिर में वर्ष 2004-09 की केन्द्र की यूपीए सरकार ने करीब एक हजार करोड़ की महानंदा तटबंध परियोजना को मंजूरी दी। वर्ष 2010 में इस परियोजना की आधारशिला भी रखी गई।हालांकि यह परियोजना पिछले सात साल से अधर में है। हाल में आई बाढ़ को लेकर किशनगंज जिला प्रशासन की ओर से जारी प्रतिवेदन में बताया गया कि जिलांतर्गत बहने वाली नदियों पर तटबंध नहीं रहने के कारण जल-प्रलय की स्थिति उत्पन्न हुई। फिलहाल इस त्रसदी के बाद केन्द्र व राज्य सरकार सजग हुई है। उम्मीद है कि महानंदा 

परियोजना जल्द साकार हो जाएगी।23 अगस्त को किशनगंज का दिवंगत सांसद ने किया था आखिरी दौरा दौरे के क्रम में महानंदा परियोजना के अधर में रहने पर काफी तल्खी दिखाई मो.तस्लीमुद्दीन सीमांचल के गांधी कहे जानेवाले अररिया सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन की खबर सुनते ही राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव राजद नेता शिवानंद तिवारी के साथ सोमवार को अररिया पहुंचे।उन्होंने कहा कि मैंने एक बड़ा भाई और पार्टी ने एक कद्दावर नेता खो दिया है।पार्टी को उनकी हमेशा खलेगी।लालू प्रसाद ने कहा कि 1988 से वह और तस्लीमुद्दीन साथ थे।पार्टी को हमेशा उनका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है।उन्होंने बताया कि तस्लीमुद्दीन भले ही उनके बड़े भाई थे,लेकिन उन्होंने हमेशा उन्हें चाचा कहकर ही बुलाया। तस्लीमुद्दीन ने बड़े भाई के साथ-साथ चाचा का फर्ज भी निभाया।गलतियों पर वह डांटते भी थे।राजद सुप्रीमो ने कहा कि तस्लीमुद्दीन जमीन से जुड़े नेता थे और उन्हें सभी बातों का एहसास था।लालू प्रसाद ने कहा कि सीमांचल के गांधी गरीबों व मजलूमों के मसीहा थे।उन्होंने जीवनपर्यंत गरीबों के लिए लड़ाई लड़ी।वह एक निर्भीक 

नेता थे।उन्होंने गरीबों के हक की लड़ाई के लिए किसी से भी समझौता नहीं किया।उनके लिए कोई जाति और धर्म नहीं था।वह सबको साथ लेकर चलते थे।मौके पर विधायक यदुवंश यादव, चंद्रशेखर यादव, अनिल यादव, पूर्व विधायक जाकिर हुसैन, जिलाध्यख कमरूज्जमा, रज्जाक, मनोज यादव आदि मौजूद थे।सांसद तस्लीमुद्दीन का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक निवास सिसौना में सुपूर्द-ए-खाक होगा।सुपूर्द-ए-खाक में हजारों लाखों लोगों के जुटने की संभावना है।वहीं उनके निधन पर अररिया के व्यापारी संघ ने एक दिन के लिए बाजार बंद रखने का आह्वान किया है।जानकारी के अनुसार संध्या के करीब साढ़े सात बजे पार्थिव शरीर अररिया पहुंचेंगे।अररिया में उनके आवास पर पार्थिव शरीर को करीब दो घंटे तक रखा जाएगा।इसके बाद रात में शव को जोकीहाट के सिसौना स्थित उनके पैतृक आवास ले जाया जाएगा।इससे पूर्व बागडोगरा से पार्थिव शरीर को किशनगंज लाया गया। किशनगंज के बाद पूर्णिया के जलालगढ़ में करीब आधा घंटा तक रखा गया। उसके बाद शव को अररिया लाया गया है। सांसद 

मोo तस्लीमउद्दीन ने 77 वर्ष की पारी में सरपंच से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री तक का सफर पूरा किया। सामंतवाद व गरीबी के खिलाफ बिगूल फूंकने वाले तस्लीमउद्दीन सीमांचल के गांधी के रूप में विख्यात हुए। उस वक्त से ही तस्लीमउद्दीन को सीमांचल का गांधी कहा जाने लगा।उनका जन्म चार जनवरी 1940 को अररिया के जोकीहाट के सिसौना के अमजद अली के घर में हुआ था। फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।लोगों का दु:ख-दर्द बांटते हुए वे समाज सेवा की राह में आगे बढ़ते चले गए। फिर इसके बाद लगातार समाज मे फैली कुरीतियों और सामंती विचार-धारा के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे।

  • 1989 में जनता दल के टिकट पर पूर्णिया लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के दौरान समर्थकों ने नारा दिया था,तस्लीम नहीं आंधी है, सीमांचल का गांधी है।
  • वर्ष 1954 में उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा।
  • 1959 में पैतृक गांव सिसौना के सरपंच बने।
  • 1969 में कांग्रेस के टिकट पर जोकीहाट विधानसभा से एमएलए का चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे।
  • 1964 में सिसौना के मुखिया निर्वाचित हुए।
  • 1972 में निर्दलीय चुनाव लड़कर जोकीहाट सीट से जीत का परचम लहराया।
  • 1974 में जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले तस्लीमुद्दीन जनता पार्टी की टिकट पर जोकीहाट से तीसरी बार विधायक बने।
  • 1980 में अररिया और 1985 में जोकीहाट से एमएलए का चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
  • 1989 में जनता दल की टिकट पर पूर्णिया लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा।
  • 1995 में जोकीहाट से विधायक का चुनाव जीते।
  • 1996 में किशनगंज लोकसभा से चुनाव लड़े व बड़ी जीत दर्ज करते हुए जनता पार्टी के सांसद बने।
  • 1998 में अपने संसदीय जीवन मे तीसरी व किशनगंज से दूसरी बार सांसद चुने गए।
  • 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी युग के उदय में शाहनवाज हुसैन के हाथों किशनगंज सीट से शिकस्त मिली, लेकिन 2000 में किशनगंज से विधानसभा चुनाव जीतकर वे राबड़ी मंत्रिमंडल में शामिल होकर सीमांचल के विकास को रफ्तार देने में जुटे रहे।
  • 2004 में किशनगंज सीट से केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन को करारी पटखनी देकर जीत का परचम लहराया।
  • 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मौलाना असरारुल हक कासमी के हाथों तस्लीमुद्दीन को हार का सामना करना पड़ा।
  • 2014 में राजद के टिकट पर वे अररिया से चुनाव जीते और अपने संसदीय जीवन में पांचवीं बार सांसद चुने गए। अररिया सांसद तस्लीमुद्दीन ने रविवार को अपोलो हॉस्पिटल हैदराबाद में अंतिम सांसें ली।

इसके बाद लगभग 20 साल विधायक रहने के दौरान बिहार की राजनीति में अपनी धाक जमा चुके तस्लीमुद्दीन कांग्रेस की परंपरागत सीट से जीत का डंका बजाकर तस्लीमुद्दीन पूर्णिया प्रमंडल में अपनी एक अलग पहचान बनाई।इसके बाद उन्होंने पूर्णिया प्रमंडल को सीमांचल का नाम दिया तथा समय-समय पर अलग राज्य की मांग करते रहे। फिर  पार्टी के निर्देश पर वे केंद्र में एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी और सांसद तस्लीमुद्दीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बनाए गए।25 अप्रैल 1992 का दिन सीमांचल के इतिहास में उस वक्त अमिट हो गया था जब पटना उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बिमल चंद्र बसाक के स्वागतकर्ता सांसद मो.तस्लीमउद्दीन बने थे।यह लम्हा इसलिए खास था,क्योंकि उस वक्त तत्कालीन लालू सरकार और 

न्यायपालिका के बीच टकराव सतह पर आ गया था।खुद तस्लीम भी विवादों से घिरे हुए थे।उसी दौरान बिहार राज्य लोकहित कार्यकलाप संस्थान की ओर से पूर्णिया में राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया।25 अप्रैल 1992 को कला भवन में कार्यक्रम का उद्घाटन पटना उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बिमल चंद्र बसाक को करना था। संस्थान की ओर से कार्यक्रम का स्वागताध्यक्ष मो.तस्लीमउद्दीन को बनाया गया, जिसे लेकर कई नेता और वकील विरोध पर उतर आए।हालांकि संस्थान ने आयोजन कमेटी में कोई भी फेरबदल करने से इनकार कर दिया।तमाम विरोधों के बावजूद यह कार्यक्रम सफल रहा।मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मो.तस्लीमउद्दीन ने पूर्णिया में हाईकोर्ट की बेंच की मांग प्रमुखता से उठाई थी।पूर्व मंत्री सह राष्ट्रीय जनता दल 

के सांसद मो. तस्लीमुद्दीन के जनाजा में शामिल होने जा रहे राजद सुप्रीमो लालू यादव का समर्थकों ने सोमवार को सिमराही बाजार एवं बेलही पुल के समीप एनएच 57 पर रोककर फूल-माला से स्वागत किया।मालूम हो कि मो.तस्लीमुद्दीन राष्ट्रीय जनता दल के वर्तमान सांसद के साथ-साथ पार्टी के कद्दावर नेता में से एक थे।जिनका निधन शनिवार को हो गया।जिसे लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव के साथ पूर्व मंत्री चंद्रशेखर यादव, शिवानंद तिवारी, पिपरा विधायक यदुवंश प्रसाद यादव के साथ फोरलेन के रास्ते अररिया स्थित उनके पैतृक निवास स्थान जा रहे थे।सिमराही बाजार में प्रखंड अध्यक्ष प्रकाश यादव के नेतृत्व में दर्जनों समर्थकों ने फूल माला से उनका स्वागत किया जबकि बेलही पुल के समीप युवा राजद के जिलाध्यक्ष भूपनारायण यादव के नेतृत्व 

में सैकड़ों की संख्या में राजद समर्थकों ने पार्टी के बैनर झंडा लेकर अपने नेता का स्वागत किया।इस दौरान अनिल यादव, संजय कुमार यादव, बोधि यादव, प्रभुनारायण मंडल, रामरूप शर्मा, हरिनारायण यादव, अवधेश जहां, मुक्तिनाथ रजक, पवन प्रधान, दुखा लाल यादव, गंगा शर्मा, कमल शर्मा, कुसुम लाल सुतिहार, जीतन यादव, राजीव कुमार, अजय कुमार, वसंती शर्मा, कमल यादव, दिलीप यादव, किन्नु यादव, जयनारायण यादव, शोभानंद राम, वासुदेव यादव, देबु पण्डित, रामनन्द यादव, जयनारायण यादव, शिवनारायण यादव आदि मौजूद थे।गौर करे की सांसद तस्लीमउद्दीन की मौत की खबर सुनते ही अररिया से जोकीहाट सिसौना अपने घर आ रहे उनका पोता कैफ सउद की जीरोमाइल अररिया के निकट सड़क हादसा में रविवार को मौत हो गई।पंद्रह वर्षीय कैफ

सांसद तस्लीमउद्दीन का भांजा स्वर्गीय हाजी सउद का पुत्र था।सूचना मिलते ही अररिया पुलिस घटनास्थल पर पहुंच कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया।उनका शव रविवार को सिसौना पहुंचते ही गांव दोहरे शोक में डूब गया।रविवार की देर शाम जनाजे की नमाज के बाद ही उनके शव को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।जनाजे की नमाज में सैकड़ों लोग शामिल हुए।कैफ सउद अपने भाई के साथ मोटरसाइकिल से सिसौना अपने घर आ रहा था।इस दौरान जीरोमाइल अररिया के निकट सड़क दुर्घटना में रविवार की शाम मौत हो गई।मौत की खबर फैलते ही सिसौना में दोहरा गम छा गया।मां जहांआरा,बडे भाई राशिद उर्फ चांद,नवाब तथा बहन तारा का रो रोकर बुरा हाल है।मां का सबसे प्यारा बेटा था कैफ।मां जहांआरा ने कहा कि उनका बेटा लाखों में एक था।कैफ से मुङो ही नहीं बल्कि पूरे समाज को उम्मीद थी।कैफ अररिया जिला जूनियर क्रिकेट टीम की ओर से चयनित हुआ था। वह मंगलवार को क्रिकेट खेलने जाने वाला था।उसने जीत की दुआ भी मां से मांगी थी।उनके चाचा मो वदूद ने बताया कि कैफ पढ़ने में भी बहुत तेज था।अररिया पब्लिक स्कूल में वह नौंवी का छात्र था।

रिपोर्ट-धर्मेन्द्र सिंह 

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