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2016 में जब्त किए गए 388 अवैध हथियार तेजी से बढ़ी है अवैध हथियारों की तस्करी, हेडलाईट्स व डुप्लीकेट टंकी में होती तस्करी…

राजधानी दिल्ली में जरायम कभी कम तो कभी अपने चरम पर होता है।छोटे क्रिमिनल से लेकर बड़े गैंगस्टरों के क्राइम और गैंगवार से दिल्ली अक्सर जूझती रहती है।लेकिन राजधानी में अपराधी अब हाईटेक हो चले हैं,क्योंकि दिल्ली में एक बार फिर अवैध हथियारों की तस्करी सिरदर्द बन गयी है।दिल्ली-एनसीआर में अवैध हथियारों की आपूर्ति और उससे उपजे क्राइम शहर की आबोहवा खराब कर रही है।आप शायद यकीन ना करे,लेकिन साल 2016 और साल 2017 के बीच दिल्ली में अब तक 1000 से अधिक अत्याधुनिक अवैध हथियारों की खेप बरामद की जा चुकी है और जो हथियार अपराधियों तक पहुंच गए उसका कोई आंकड़ा भी मौजूद नही है।कभी बिहार के मुंगेर से  

तेजी से बढ़ी है अवैध हथियारों की तस्करी । 2016 में जब्त किए गए 388 अवैध हथियार । मुंगेर-खरगोन रहा है अवैध हथियारों का गढ ।रोजगार का अकेला विकल्प था अवैध हथियार । हर घर में थे अवैध हथियार बनाने की मशीन । 10,000 ले 15,000 में खरीदे जाते हैं हथियार । हथियार तस्करों को पकड़ने में नाकाम है पुलिस । बंद हुईं मुंगेर की 80-90 फीसदी फैक्टरियां ।


दिल्ली एनसीआर में सप्लाई होने वाले हथियारों के सौदागरों ने मुंगेर की जगह अब मध्य प्रदेश को हथियारों का गढ़ बना लिया है।मध्य प्रदेश में 10 से 20 हजार रुपये में खऱीदा गया हथिय़ार दिल्ली-एनसीआर में अपराधियों को करीब 30 से 40 हजार रुपये तक में बेचा जाता है।दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव के मुताबिक वर्ष 2017 में अब तक करीब 450 से ज्यादा उम्दा क्वालिटी की पिस्टल,रिव़ॉल्वर और सैकड़ों की तादाद में कारतूस बरामद कर चुकी है जबकि करीब 44 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।एक हफ्ते में बरामद हुए 37 अवैध पिस्टल रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली एनसीआर में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच औऱ स्पेशल सेल लगातार ऐसे हथियारों की खेप को बरामद कर रही है।पिछले एक हफ्ते में ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल 37 पिस्टल बरामद कर चुकी है और 4 हथियार तस्करों की गिरफ्तारी भी की जा चुकी है।राम गोपाल औऱ नसीम सिंह नाम के दो ऐसे ही लोगो को हाल में गिरफ्तार किया गया है।राम गोपाल को दिल्ली के दरियागंज और नसीम को आगरा से पकड़ा गया है।कई पार्ट्स में होती है हथियारों की तस्करी।पूछताछ मे सामने आया कि रामगोपाल मुंगेर में हथियारों की फैक्ट्री चलाता है।ये इतने शातिर है कि पूरी पिस्टल को दिल्ली में नही लाते,बल्कि उसके अलग-अलग पार्टस में दिल्ली लेकर आते है औऱ फिर उनको आगे सप्लाई करते है।

इससे पहले भी स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा की टीम में एक लेडी मास्टरमाइंड और उसके साथियों को गिरफ्तार किया था,जो मध्यप्रदेश से हथियारों की खेप दिल्ली में लाकर बेच देते थे।पिछले चार वर्षों में दिल्ली पुलिस द्वारा बरामद किए गए ऐसे अवैध बंदूकों की संख्या चिंता करने वाली है।रिपोर्ट कहती है कि पिछले वर्ष जून तक पुलिस ने करीब 388 अवैध बंदूकें जब्त की थी जबकि वर्ष 2015 और वर्ष 2014 में क्रमशः 431 और 868 अवैध हथियार जब्त किए गए। वहीं, वर्ष 2013 और वर्ष 2012 के आंकड़े भी चौंकाने वाले है।वर्ष 2012-13 के बीच कुल 1286 अवैध बंदूकें दिल्ली पुलिस ने जब्त किया था।दिल्ली-एनसीआर में आने वाले 90 फीसदी अवैध हथियारों की आपूर्ति बिहार के मुंगेर जिले से निर्मित अथवा मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की होती हैं।बिहार का मुंगेर जिला व मध्य प्रदेश का खरगोन जिला अवैध हथियारों के निर्माण का इतिहास रहा है,हालांकि दिल्ली पुलिस काफी बाद जब हरकत में आई तो बिहार पुलिस की मदद से मुंगेर की 80-90 फीसदी अवैध हथियारों की फैक्टरियों को बंद कराने में सफलता पाई थी।कहा जाता है कि उक्त अवैध हथियार फैक्टरियों में करने वाले लोग जिले के निवासी ही थे,क्योंकि अवैध बंदूकों के निर्माण करने वाली फैक्टरियों में काम के अलावा वहां उनके पास कोई और रोजगार का विकल्प न के बराबर था,लेकिन इन फैक्टरियों के बंद होने से सैकड़ों की संख्या में लोग बेकार हो गए।लेकिन उनमें से कुछ लोगों ने अवैध बंदूकों की छोटी-मोटी फैक्टरी घर में डाल ली और हथियार बना कर क्षेत्रिय अपराधियों को बेचने लगे।दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर संजीव यादव के मुताबिक मुंगेर जिले के सभी गांवों के लगभग सभी घरों में अवैध हथियार बनाने वाली (खराद) मशीन मौजूद थे,जो कि अच्छी क्वालिटी के हथियार गढ़ने में काम आते हैं।इनमें देसी कट्टा,पिस्तौल के अलावा अन्य सभी तरह के ऑटोमेटिक पिस्टल और रिवाल्वर शामिल है।कुछ तो एके 47 जैसे हथियार भी बनाने में उस्ताद हैं,जिनकी बनावट ऐसी होती थी कि उनकी पहचान करना मुश्किल होता है कि कौन हथियार नकली है और कौन असली ? अवैध हथियारों की बिक्री और वितरण का काम अलग-अगल राज्यों के बिचौलिए द्वारा किया जाता हैं।अवैध हथियारों में शामिल देसी पिस्तौल,रिवाल्वर,देसी कट्टा को बिक्री व वितरण के दिल्ली भेजा जाता है और विभिन्न राज्यों के बिचौलिओं के एजेंट के जरिए बाद में विभिन्न राज्यों के अपराधियों और गैंग सदस्यों को आसानी से बेच दिया जाता है।चूंकि दिल्ली की आबादी काफी सघन है,इसलिए अवैध हथियारों के खरीदारों और बेचनेवालों के बीच हथियारों के आदान-प्रदान के रुप में दिल्ली एक बेहतर विकल्प हो गया है।मेरठ,आगरा,मथुरा और अलीगढ़ में रहनेवाले अपराधी अपने हथियारों की डिलीवरी दिल्ली में ही लेते है,क्योंकि दिल्ली में बिचौलियों के पकड़े जाने के चांस बहुत कम होते हैं।बिचौलिए इन

हथियारों को दिल्ली में बहुत ही चालकी से कार द्वारा पहुंचाते है।पुलिस की निगाहों से बचाने के लिए वे हथियार को कभी डुप्लीकेट पेट्रोल की टंकी में तो कभी कार के अंदरुनी हिस्सों व हेडलाईट्स के पीछे छिपा कर पहुंचाते है,जिन्हें फौरी जांच में पुलिस के लिए पकड़ना बहुत मुश्किल होता है।दिल्ली में अवैध हथियारों की डिलीवरी करने वाले बिचौलिए प्रायःएक बार में 100 हथियारों के कम की डिलीवरी नहीं करते हैं और दिल्ली में ही इन हथियारों की बिक्री देश के अलग-अलग इलाकों के बिचौलिए के एजेंट को की जाती है।जिसे बाद में एजेंट अलग-अलग राज्यों के अपराधियों को सुविधानुसार 15, 000 से 1 लाख तक में बेच देते हैं।तस्करों के लिए दिल्ली में एंट्री के हैं 1000 रास्ते,दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के विशेष आयुक्त के मुताबिक दिल्ली में प्रवेश करने के 1000 से अधिक प्वाइंट है और इन रास्तों से गुजर रहे वाहन की निगरानी व जांच करना मुश्किल है।थोड़े हथियारों की आपूर्ति के लिए बिचौलिए प्रायःहथियारों को सूटकेस व बैग में रखकर तस्करी कराते है और हथियारों के परिवहन के लिए प्रायः बिचौलिए महिला ट्रांसपोर्टर का इस्तेमाल करते है,क्योंकि महिला ट्रांसपोर्टर की तलाशी कम होती है।दिल्ली पहुंचते ही दिल्ली में मौजूद बिचौलियों के एजेंट के जरिए हथियार तुरंत बेच दिए जाते है।दिल्ली में यहां होती अवैध हथियारों की डिलीवरी आपको बताते चले की बिचौलिओं के एजेंट प्रायःअवैध हथियारों की डिलीवरी के लिए दिल्ली के ऐसे इलाकों को चुनते हैं,जहां अपराधी और अपराध का ग्राफ अधिक हैं।इनमें नजफगढ़, बदरपुर, संगम विहार और उत्तरी दिल्ली के कुछ इलाके प्रमुख हैं।दिल्ली में लाए गए अवैध हथियारों की बिक्री दिल्ली-एनसीआर ही नहीं,बल्कि उत्तरी भारत के अन्य इलाकों के इच्छुक खरीदारों को भी की जाती है।दिल्ली में अवैध हथियारों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति के बार में तब खुलासा हुआ जब वर्ष 2012 में दिल्ली पुलिस ने दो बड़े हथियारों की डिलीवरी करने जा रहे एक तस्कर का पकड़ने में कामयाबी हासिल की।इसके बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हथियारों के स्रोत के बार में तहकीकात शुरू कर दी।अवैध हथियार निर्माण में कुख्यात बिहार के मुंगेर जिले में बिहार पुलिस की मदद से दिल्ली पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमार की और मुंगेर के 80-90 फीसदी हथियार के कारखानों को तबाह कर दिया गया।कहते हैं कि इसके बाद मुंगेर से दिल्ली आने वाले अवैध हथियारों की तस्करी में बड़ी कमी आई,लेकिन मध्य प्रदेश के खरगौन और मंदसौर जिलों से हो रही हथियारों की तस्करी ने एक बार फिर दिल्ली पुलिस के दांत खट्टे करने शुरू कर दिए हैं।वर्ष 2016-2017 में डीसीपी प्रमोद कुशवाहा और संजीव यादव के नेतृत्व में गठित लोधी कालोनी,न्यू फैंडंस कालोनी,रोहिणी और आर के पुरम स्थित टीम ने मध्य प्रदेश के सेंधवा, खरगोन, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, शाजापुर, खंडवा, उज्जैन औऱ मालवा के कई और इलाकों से निर्मित अवैध हथियारों की खेप को दिल्ली से बरामद कर चुकी है औऱ अब तक करीब 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार भी हो चुकी है।जिसमे बिहार पुलिस की मुख्य भूमिका थी ।

रिपोर्ट-दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार की रिपोर्ट 

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