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हिज्बुल ने 30, तो लश्कर ने जोड़े 15 नए आतंकी, जम्मू-कश्मीर में 147 घंटे की बड़ी साजिश…

कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर हुआ हमला एक बानगी भर है,क्योंकि आतंकी बुरहान वानी की मौत की बरसी परआतंकियों के मंसूबे और भी खतरनाक हो सकते है।अनंतनाग में तीर्थयात्रियों को निशाना बनाया गया है,जिसमें अब तक 7 की जान जा चुकी हैं जबकि दर्जनों घायल हुए हैं।कश्मीर में बुरहान की बरसी पर 8 जुलाई से 13 जुलाई के बीच और आतंकी हमले की आशंका है।यानी वर्ष 2016 में आतंकी बुरहान वानी मौत के नाम पर जिस तरह से खून खराबा हुआ था, उसे आतंकी एक बार फिर दोहरा सकते है।झूठ,फ़रेब और चालबाज़ी आतंकी और उनके आकाओं की फितरत बन चुकी है। कमाल की बात यह है कि इस बार बाक़ायदा साज़िश के लिए एक तारीख़

मुकर्रर की गई है।जी हां,यह दिन था 8 जुलाई,2017 यही वो तारीख़ था जिस दिन आतंकियों ने भारत के ख़िलाफ़ आतंकी हमले का साजिश बुनी थी,लेकिन इस बार उनका पैतरा अलग था।गत 8 जुलाई को पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं ने कश्मीर की जन्नत को जहन्नुम बनाने की नई कोशिश शुरू की हैं।इस साज़िश के तहत पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI कश्मीर में फिर ख़ून-खराबे की शुरुआत करने की साजिश रची है।सरहद पार बैठे आतंकी सरगनाओं का कश्मीर घाटी में आतंक फैलाने का यह एकदम नया पैंतरा है।एक नए फार्मूले के तहत आतंकी अब फ़रेब की फ़िल्मों को हथियार बनाया है।जम्मू-कश्मीर में तबाही और बर्बादी की प्रत्येक कोशिश में नाकामी के बाद आतंकियों ने फ़िल्मों,टीवी चैनलों के माध्यम से इन फिल्मों का सहारा ले रही है,क्योंकि पिछले कई दिनों से भारतीय सीमा में होने वाली घुसपैठों पर लगाम कसा जा चुका है,जिससे आतंकी संगठन बौखलाए हुए हैं।घुसपैठ के खिलाफ भारत के मुंहतोड़ जवाब से आतंकी संगठन ही नहीं,बल्कि उनको पालने-पोषने वाले आका भी परेशान है।पिछले वर्ष 8 जुलाई 2016 को हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में काफी खून-खराबा हुआ था।हालांकि इसे वक्त रहते काबू कर लिया गया था,लेकिन तारीख 8 जुलाई को लेकर आतंकी एक साज़िश के तौर पर इस्तेमाल करने जा रहे है।8 जुलाई वहीं तारीख है जब हिज्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की मौत हुई थी।आतंकी पिछले लंबे वक्त से बुरहानी वानी के नाम पर जम्मू कश्मीर में अमन खत्म करने की चाल चलते आ रहे है।लेकिन इस बार तरीका जुदा है।आतंकियों ने गत 8 जुलाई को बुरहानी वानी के नाम पर बनाई एक फिल्म को रिलीज़ की है,जिसमें उसको एक हीरो बतलाया गया है।रिलीज़ से पहले फिल्म को आतंकियों द्वारा टीवी चैनलों पर खूब जमकर प्रचार किया गया।टीवी चैनलों के अलावा फिल्म के ट्रेलर को यूट्यूब,फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया पर भी प्रमोट किया गया।आतंकियों का सिर्फ एक ही मकसद है कि बुरहान के नाम पर इस वर्ष भी कश्मीर में खून खराबा किया जाए।बड़े ही पेशेवर अंदाज में तैयार किए गए इस फिल्म में कश्मीरी युवाओं को भड़काने की कोशिश की गई है।फिल्म में हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ भी जमकर दुष्प्रचार है।लेकिन कमाल की बात ये है कि फिल्म के ट्रेलर में फिल्म से जुड़े किसी शख्स का नाम तक नहीं दर्ज है।यानी फिल्म में फिल्म के निर्माता,निर्देशक से लेकर कलाकारों तक का भी उल्लेख नहीं है।फ़िल्म में दिखाया गया है कि बुरहान वानी को 

मारने की साज़िश दिल्ली में रची गई जबकि हकीकत यह है कि बुरहान सेना के एक ऑपरेशन में ढेर हुआ था।फिल्म में सेना के बारे में भी कई आपत्तिजनक बातें कही गई हैं।पाकिस्तान की सरपरस्ती में बैठे आतंक के आका बुरहान वानी की मौत को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और बुरहान के नाम पर आतंकी संगठन और उनके आका घाटी में खून खराबे का एक नया सिलसिला शुरु करने के लिए बेताब हैं।इसके लिए सभी आतंकी संगठन अलग-अलग साजिश रच रहे हैं और ये फिल्म भी इसी साज़िश का एक महज हिस्सा है।आतंकी बुरहान वानी की मौत की तारीख़ को हथियार बनाकर जम्मू कश्मीर में आतंक की नई इबारत लिखने की कोशिश कर रहे हैं।इसके लिए एक तरफ बुरहान वानी पर फिल्म जारी की गई और इंटरनेट पर हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ गाने और भड़काने वाले वीडियो रिलीज किए जा रहे हैं।जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ भड़काऊ वीडियो की बाढ़ सी आई हुई है।बुरहान वानी की मौत के एक साल पूरा होने पर आतंकियों के आका किस तरह अपने मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बेचैन है।इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि घाटी में मौजूद सभी आतंकी संगठनों ने अलग-अलग तैयारी की है,जिसमें सबसे बड़ी खूनी साज़िश हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन ने रची है।बुरहान की मौत के एक साल पूरा होने पर हिज्बुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन ने एक वीडियो जारी कर 8 जुलाई को बुरहान की याद में मनाने का एक फरमान जारी किया।सलाहुद्दीन ने ऐलान किया है कि 8-13 जुलाई के बीच हिज्बुल मुजाहिदीन शोक-सभा आयोजित करने व घाटी बंद का भी ऐलान किया और सुरक्षाबलों पर हमले की भी साजिश रची है।हिज्बुल की तरह की लश्कर-ए-तैयबा ने भी बुरहानी वानी के नाम पर घाटी में फिर आग लगाने की पूरी तैयारी की है।लश्कर की खून खराबे के साथ-साथ इस मौके पर युवाओं को आतंक की दुनिया में दाखिल कराने की भी साजिश रच रहा है।

गत 10 जुलाई को रात 8 बजे अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले इसकी तस्दीक करते हैं।इस हमले में अब तक 7 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है जबकि दर्जनों गंभीर रुप से घायल हैं।लश्कर बुरहान वानी के नाम पर युवाओं को सोशल मीडिया के ज़रिए भी भड़काने में लगा है।उसने मजहब के नाम पर घाटी में हिंसा भड़काने की साजिश रची है और घाटी में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए लश्कर ने ISIS से भी हाथ मिला लिया है।सोशल मीडिया पर भड़काउ संदेश जारी करने के पीछे लश्कर का ही हाथ माना जा रहा है।हाफिज सईद के नजरबंद होने के बाद लश्कर की कमान उसके साले अब्दुल रहमान मक्की के हाथ में है (मक्की के नाम की मुहर लगाएं) मक्की ने लश्कर की कमान संभालते ही सोशल मीडिया के जरिए आतंक फैलाने पर फरमान सुनाया था,जिसके बाद घाटी में भड़काऊ वीडियो की बाढ़ सी आ गई है।बुरहान वानी की मौत की तारीख को हथियार बनाकर पाकिस्तान ने घाटी को सुलगाने की जो साज़िश रची,उसमें हिज़्बुल मुजाहिदीन से अलग हुआ आतंकी कमांडर ज़ाकिर मूसा भी शामिल हैबुरहान वानी की मौत के बाद ज़ाकिर मूसा कश्मीर घाटी में आतंक का नया चेहरा बनने के लिए बेताब है।ज़ाकिर बुरहान का ही साथी था,लेकिन अब ज़ाकिर बुरहान के नाम पर खुद को आतंक का नया सरगना बताना चाह रहा है।ज़ाकिर कुछ महीने पहले तक हिज़्ब का कमांडर था, लेकिन अब उसके मंसूबे इतने बढ़ गए हैं कि वो हिज़्ब छोड़कर अपना आतंकी संगठन तैयार कर रहा है।अब बुरहान वानी के नाम पर ज़ाकिर अपना संगठन मजबूत करने में जुटा हुआ है।बुरहान के ढेर होने के बाद जाकिर को हिज्ब का कमांडर बनाया गया था,अब वो बुरहान के नाम का सहारा लेकर उससे बड़ा आतंकी बनने का ख्वाब देख रहा है।घाटी में आया अमन आतंकियों को गवारा नहीं है इसलिए उन्होंने बुरहान वानी के एनकाउंटर के एक साल पूरा होने पर 147 घंटे की एक बड़ी साज़िश रची है।147 घंटे की अपनी साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए आतंकियों ने एक कैलेंडर जारी किया है।इस कैलेंडर में 8 से 13 जुलाई के बीच घाटी में घमासान का ब्लूप्रिंट दिया गया है।आतंक के आकाओं द्वारा जारी किए कैलेंडर में उनकी साजिशों के बारे में भी बताया गया है।आतंकियों की कोशिश है कि बुरहान वानी के नाम पर कश्मीर के युवाओं को भड़का कर आतंक की दुनिया में शामिल किया जाए।आतंक का जो 

कैलेंडर घाटी में जारी किया गया है।इलाके में आतंकी अपनी साज़िशों को अंजाम देने की कोशिश करेंगे।09 जुलाई को ददसोरा जबकि 10 जुलाई को नूरपोरा में मार्च निकालेंगे।इसके बाद 11 जुलाई को आतंकी पुलवामा और 12 जुलाई को श्रीनगर में साज़िश को अंजाम देने की कोशिश करेंगे।इसके बाद 13 जुलाई को पंपोर का इलाका चुना गया है।बुरहान वानी के एनकाउंटर के एक साल पूरा होने पर आतंकियों ने एक दो नहीं,बल्कि दर्जनों साज़िश रची है, जिसके पीछे हिज्बुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैय्यद सलाहुद्दीन का दिमाग काम कर रहा है।खून-खराबे की यह साज़िश एक दो दिन में तैयार नहीं हुई है, बल्कि 8 जुलाई से शुरु हुए आतंक का ब्लूप्रिंट कई महीनों की तैयारी के बाद बनाया गया है।इसके लिए जगह-जगह कश्मीरी नौजवानों को बहका कर आतंकी बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है तो उन्हें मज़हब के नाम पर भड़काने के लिए सोशल मीडिया का भी जमकर इस्तेमाल हो रहा है।आतंकियों ने बुरहान के नाम पर घाटी में शोले भड़काने की जो चाल चली है।उसकी तैयारी पिछले काफी दिनों से की जा रही है।खुफिया जानकारी के मुताबिक पिछले डेढ़ महीने में 60 नए आतंकी तैयार किए गए हैं।अब तक हिज्ब और लश्कर ही आतंकी तैयार करते थे,लेकिन अब हिज्ब से अलग हुआ जाकिर भी अपना संगठन तैयार कर रहा है।पिछले डेढ़ महीने में सैय्यद सलाहुद्दीन के हिज्बुल से 30 आतंकी जुड़े हैं जबकि हाफिज सईद के लश्कर ने 15 नए आतंकी तैयार किए है।इसके अलावा हिज्बुल छोड़कर अपना संगठन वाले ज़ाकिर मूसा ने 15 आतंकी तैयार किए है।घाटी में आग भड़काने की आतंकियों की साजिश का एक हैरान करने वाला पहलू यह भी है कि घाटी में आतंकी संगठन अब तक युवाओं को ही शामिल करते थे,लेकिन अब उन्होंने बच्चों को भी निशाना बनाना शुरु कर दिया है।

रिपोर्ट-न्यूज़ रिपोटर 

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