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स्थापना-1 कार्यालय नहीं आकर किरानी मिर्तुन्जय अपना घर से करते है कार्य…वही गबन के आरोपी निलंबित शिक्षक से कार्य लेते है डीपीओ-वन किशनगंज…..

शिक्षको का कहना है कि डीपीओ कार्यालय में मिर्तुंजय जी है वो अपना घर से ही काम करते है नाम नही छापने के शर्त पर बताया कि जब-जब स्थापना कार्यालय आता हूँ ताकि मिर्तुंजय जी मिल जाये और हमारा तनख्वाह मिल जाये।पर वो नही आते है कार्यालय चार पांच लोग है जो मिर्तुंजय का काम करता है जिसे साफ तौड़ पर दलाल कह सकते है।आपको मालूम हो कि शिक्षक लोग कहते है कि जिस जिस ने चढ़ावा चढ़ाया है उन लोगो का बिल चला गया है जिन लोगो ने चढ़ावा नही चढ़ाया उन लोगो को कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है।जो कि सरासर गलत है।सूत्र कहता है कि बिना रुपया लिए कार्य होना लोहे का चने चबाने के बराबर है।कौन है नकुल पांडे ? रोज रोज क्यों आता है जिला में,मिर्तुंजय के घर पर ? कौन है देवरत पोद्दार ? स्कूल पढ़ाने जाने के बजाए क्यों आता है मिल्लनपल्ली मिर्तुंजय से मिलने ? कौन है अपूर्व कुमार ? रोज रोज क्यों स्थापना कार्यालय के कंप्यूटर पे बैठा मिलता है।जब कि ठाकुरगंज स्कूल का शिक्षक है जिस पर गबन का लाखो रुपए का मामला है।क्या राज है जो जानकारी देने के बाबजूद कोई कार्रवाई नही करते अधिकारी।ऐसा अनेको प्रशन है और जबाब एक भी नही।कार्यालय से फाइल गायब होने का क्या रहष्य है ? यहाँ तक कि डीइओ किशनगंज द्वारा आदेश भी दिया गया है कि शिक्षक का भुगतान यथा शीघ्र करे।पर आदेशो का उलंघन करना ये अपना परम् कर्तव्य समझते है,सायद इसी लिए आदेश का उलंघन करते हो कही।आपको मालूम हो कि जब प्रलयकारी बाढ़ किशनगज जिला में आया था उस वक्त 
एक पैर पर शिक्षक ही थे जो डटे रहे और आम जनो का मदद किये।बाकी तो सिर्फ नाम का था और फ़ोटो खिंचाने के लिए।विभाग को कम से कम शिक्षको को समय पर भुगतान कर देना चाहिए पर यहाँ मामला कुछ और है जो जांच पर ही सामने आ सकता है  की सरकार द्वारा आदेश देने के बाबजूद शिक्षको को तनख्वाह ससमय नहीं देना यह बात कुछ अलग ही इसारे कर रहे है।समझने वाले ठीक समझते है।पर मुँह है सही को गलत और गलत को सही करना यही इन लोगो का काम है नही तो आप स्वंय विचार कीजिये कि कार्यालय न आकर घर से काम करना कहा तक उचित है ? वो भी जिस जिस पर आरोप है जो महीना में एक बार अखबार की सुर्खियों में रहते है अच्छा कार्य के लिए नही गरबर करने के लिए उन के साथ स्थापना कार्यालय के किरानी मिर्तुन्जय कुमार अपने घर पर बैठकर कार्य करवाते है और शिक्षक स्थापना कार्यालय जाता है तो पता चलता है की नहीं आये है क्या शिक्षा विभाग के कर्मी अपना हाजिरी कार्यालय में नहीं लगाते है या लगाते है तो क्या एक ही दिन सभी दिनों का हाजिरी…? एक बात समझ से परे है की स्थापना कार्यालय किशनगंज शिक्षा विभाग में गबन के आरोपी शिक्षक अपूर्वा कुमार डीपीओ वन कार्यालय में आकर कम्प्यूटर पर बैठता है।
 
शिकायत करने पर अधिकारी हस कर बात को घुमा देते है।ये वही शिक्षक है जो सूचना आयुक्त बिहार पटना को एक आरटीआई कार्यकर्ता डूबलिकेट हस्ताक्षर कर के वाद को बंद करा दिया था जिसका जानकारी आवेदक को हुआ तो उसी समय तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना श्री आसिष रंजन को लिखित शिकायत  किया गया ।जिसका ऋषिभींग भी मौजूद है।पर आज तक किसी अधिकारी ने इस संबंध में कोई जानकारी लेना या इस सम्बन्घ में जांच भी करना मुनासिब नही समझे….? जिला शिक्षा पदाधिकारी किशनगंज कार्यालय से जानकारी मांगने पर स्थापना कार्यालय पे फेक देते है।कि स्थापना में मिर्तुंजय जी है उंन्ही के पास गया है।स्थापना कार्यालय जाने पर वहाँ के कर्मी कहते है कि मिर्तुंजय जी नही आये है घर से ही काम करते है।जिसमे उनका सहयोग अपूर्वा कुमार, नकुल पांडे जो बहादुरगंज का शिक्षक है देवर्त पोद्दार वगैरा वगैरा । सवाल यहाँ यह उठता है कि कोई भी सरकारी कर्मी अपना घर पर सरकारी कार्य कर सकता है ? शिक्षक 27 किलोमीटर से आकर स्कूल नही जाकर रोज-रोज जिला मुख्यालय में क्यों आते है…? जो शिक्षक को सस्पेंड किया जिस पर लाखों रुपया का गबन का आरोप है उससे कार्य लिया जा रहा है यह क्या उचित है ? सूत्र कहता है कि अपूर्वा कुमार वसूली करने का काम करता है पर सच्चाई क्या है इस पर विभाग विचार करे।नही तो फिर किस अधिकार के साथ कार्य कर रहा है।जाली हस्ताक्षर का जो आवेदक द्वारा आवेदन दिया गया है 7 माह से ऊपर होने चला क्या शिक्षा विभाग जाली हस्ताक्षर का जांच करवाया की आवेदक सच बोल रहा है या झूठ ? अगर आवेदक द्वारा शिक्षक अपूर्व कुमार पर झुठा आरोप लगा रहा है तो विभाग को आवेदक पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी ना कि आरोपी शिक्षक को बचाने और उससे शिक्षको का वेतन से सम्बंधित कार्य लेना।आपको मालूम हो कि ये वही अपूर्व कुमार है जिसका जीजा संजय सिन्हा चार वर्ष पूर्व जिला स्थापना कार्यालय में दिन दहाड़े सेवा पुस्तिका के नाम पर घुस वसूली कर रहा था जिसका प्रमाण विभाग को उपलब्ध कराया गया था कि किस तरह से वसूली किया जा रहा है और मीडिया के दबाब पर लिया गया घुस शिक्षको को वापस किया और 
संजय सिन्हा द्वारा कहा भी गया कि पैसा वापस कर देंगे।जिसका प्रमाण वीडियो में कैद भी हो गया का मामला शिक्षा विभाग बिहार पटना को दिया गया और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना की भी मांग की गई ।सूचना उपलब्ध नही कराने को लेकर राज्य सूचना आयोग बिहार पटना में द्वितीय अपील कर सूचना उपलब्ध कराने का माननीय सूचना आयुक्त महोदय से अनुरोध किया गया था।सूचना आयुक्त बिहार पटना ने किशनगज एसडीएम को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया।अपूर्व कुमार ने जाली हस्ताक्षर कर सूचना आयोग बिहार पटना को भेज दिया कि आवेदक को सूचना उपलब्ध करा दिए है जिससे वाद को बंद कर दिया गया जिसका सूचना आवेदक भी सूचना आयोग द्वारा उपलब्ध करवाया गया तब जाकर  इसकी जानकारी हुई तब आवेदक  द्वारा तत्कालीन डीपीओ-1 किशनगज को लिखित जानकारी देते हुए साथ ही जाली हस्ताक्षर का छायाप्रति सलंग्न कर दिए।फिर भी आज तक न कोई कार्रवाई की सूचना है और ना ही इस से संबंधित कोई सूचना दी गई।और सूचना के लिए कार्यालय जाने पर इस कार्यालय से उस कार्यालय का ठीकरा फ़ॉर आवेदक को गुमराह किया जा रहा है।अभी भी सूचना का इंतजार है आवेदक को… 
रिपोर्ट-धर्मेन्द्र सिंह 
जिस किसी के पास शिक्षा विभाग किशनगंज का मामला है जिसे प्रकाशित करना आवश्यक है वो मामला हमारे Emai-dharmendrasingh.kne@gmail.com पर या हमारे whatsapp 9430230000 पर भेज सकते है।आपका नाम पता को गुप्त रखा जाएगा।सच्चाई हजम नही होता है चाहे कोई भी हो।खबर प्रकासित करने पर पत्रकार पर आरोप लगते है ये जग जाहिर है।पर पत्रकार द्वारा प्रमाण मांगने पर चुप्पी साध बैठ जाते शिक्षा विभाग किशनगंज के बड़ा बाबू मिर्तुंजय कुमार।और पत्रकार को कैसे फंसाये कैसे मुकदमा करवाये का षडयंत्र करने से भी पीछे नही हटते है।क्यों कि सच जो सामने आ गया है।सच को दबाने के लिए अपने किये गए कार्यो को दबाने के लिए इस तरह के लोग कई हद तक जा सकते है।मिर्तुंजय कुमार का तबादला कुछ वर्ष पूर्व कटिहार जिले में किशनगज से कर दिया गया था।कारण दलाली की ओर बढ़ते कदम को रोकने के लिए पर इन्होंने कटिहार में भी काफी गुल खिलाये।सीताराम मंडल जब रिटायर हुए तब फिर से मिर्तुंजय कुमार को किशनगज स्थापना कार्यालय लाया गया।और ये फिर से उसी तरह का गुल खिलाने लगे।कार्यालय नही आकर अपने घर से ही स्थापना कार्यालय चलाने लगे।इनके किराए वाले घर पर अधिकारियों और शिक्षको की लाइने लगना शुरू हुआ।इसी का पर्दाफास केवल सच ने किया।और इस तरह का पर्दाफ़ान्स केवल सच करता रहेगा।इनके जैसे लोगो से आरोप लगाने से भी पीछे नही हटने वाला है केवल सच।जब शिक्षाविभाग किशनगज के अधिकारी को किसी भी प्रकार का गबन से सम्बंधित सूचना देने पर जैसे लगता है कि सूचना देनेवाला ही कही गबनकारी नही हो सीने पर अजगर रेंगने लगता है। शिक्षा विभाग किशनगंज का एक-एक अधिकारी का पर्दाफ़ान्स करेगा केवल सच।जो अपना कार्य से गद्दारी कर भष्टो को बचाने का कार्य किया है उन लोगो का।बस थोड़ा इंतजार करें।
धर्मेन्द्र सिंह 

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