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नीतीश कुमार पर दर्ज़ हत्या के केस का पूरा ‘इतिहास’ किशनगंज में किया आरजेडी कार्यकर्ताओ ने एन एच-31 को जाम मौके पर पहुचे अधिकारी…

बिहार में एनडीए मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार के शपथ लेने के कुछ देर बाद राजद चीफ लालू यादव बीजेपी पर जमकर बरसे।उन्होंने कहा कि बीजेपी और नीतीश ने मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची और उन्हें झूठे केस में फंसाया।लालू ने यहां तक कहा कि मोदी और अमित शाह के रिश्तेदारों ने महात्मा गांधी की हत्या की थी।रांची में सीबीआई कोर्ट में पेशी के लिए आए लालू यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीतीश कुमार पर मौका परस्त होने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा बिहार की जनता ने हम दोनों को जनादेश दिया था लेकिन नीतीश ने उसका अनादर किया।उन्होंने कहा कि नीतीश के इस कदम से गांव-गांव के लोग नाराज हैं।नीतीश कुमार पर लगे हत्या के आरोप का 

जिक्र करते हुए लालू प्रसाद यादव ने कहा कि नीतीश ने गोली मारी इसके सबूत हैं।भ्रष्टाचार के बड़ा अत्याचार होता है।उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने खुद अपने शपथ पत्र में जिक्र किया था कि वह 302 समेत कई अन्य धाराओं में आरोपी हैं।बताते चलें कि साल 1991 में नीतीश पर हत्या का आरोप लगा था।बिहार में लालू-नीतीश-कांग्रेस के महागठबंधन के टूटने और नीतीश और भाजपा के पुनर्मिलन के बाद देश की राजनीति का पारा काफी बढ़ गया है।सावन का मनोहारी मौसम होने के बावजूद दिल्ली से पटना के बीच सियासी गर्म हवाएं बहुत से नए पुराने रिश्तों को झुलसाए दे रही हैं।पुराने दोस्त रकीबों के किरदार में आ गए है तो जो कल दूर थे वह आज पास आ गए हैं।सिद्धांतों को निजी सहुलियत के हिसाब जांचा परखा और इस्तेमाल किया जा रहा है।इस सब के बीच’छवि’बचाए रखने के लिए और समझौता न करने का दावा करने वाले सुशासन बाबू के नाम से मशहूर नीतीश कुमार पर पुराने मित्र रहे लालू प्रसाद यादव ने बाढ़ के पंडारक थाना के ढिबर गांव में हुई साल 1991 की सीताराम सिंह हत्या की बात कहकर ढिबर को फिर चर्चा में ला दिया है।साल 1991 के नवम्बर में बाढ़ लोकसभा उप चुनाव में सीताराम सिंह नामक व्यक्ति की बूथ पर हत्या हुई थी जिसमे नीतीश कुमार सहित 4 लोगो के खिलाफ दर्ज करवाया गया था।मृतक सीताराम सिंह के भाई राजा राम सिंह के अनुसार, मामला सत्य है इसलिये लालू यादव ने फिर इसको उठाया है।जिस दिन घटना हुई वो वहा मौजूद थे।लालू के मुताबिक मुख्‍यमंत्री नीतीश

कुमार पर एक नागरिक और एक वोटर की हत्‍या का मामला दर्ज है।लालू यादव के अनुसार 1991 में पंडारक थाने में हत्या के एक मामले में नीतीश कुमार धारा 302 के तहत आरोपी है।लालू ने कहा इस मामले में उन्होंने फर्जी दस्तावेज देकर जमानत ली है।राजद सुप्रीमो में इसको लेकर मीडिया के समक्ष दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि खुद को ईमानदार करार देने वाले नीतीश कुमार को पता था कि अब वे इस मामले में घिरने वाले है।इसको लेकर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और भाजपा के साथ फिर से जाने का मूड बना लिया है।आपको बताते चले की हत्या का यह मामला बिहार की बाढ़ संसदीय क्षेत्र से जुड़ा है।नवम्बर 1991 में बिहार में हुए लोकसभा के मध्यावधि चुनाव में तब बाढ़ में सीताराम सिंह नाम के एक व्यक्ति की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी।इस मामले को लेकर उस समय ढिवर गांव निवासी अशोक सिंह ने नीतीश कुमार सहित कुछ अन्य लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।मृतक सीताराम के रिश्तेदार राधे श्याम सिंह के अनुसार इस मसले पर 16.11.1991 पंडारक थाने में मामला दर्ज हुआ था।1 सितम्बर 2009 को बाढ़ कोर्ट के तत्कालीन एसीजेएम रंजन कुमार ने इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दोषी पाते हुए उनपर इस मामले में ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया था।बाद में इस मामले का हाईकोर्ट में स्‍थानांतरित करा दिया गया।वर्ष 2009 से लेकर अबतक यह मामला हाइकोर्ट में लंबित है।न्यायाधीश सीमा अली खान ने इस मामले में नीतीश की पैरवी कर रहे उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह की दलीलों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।बाद में फिर से मामले पर सुनवाई शुरू हुई जो अभी भी चल रही है।बाढ़ लोकसभा सीट के लिए 16 नवंबर वर्ष 1991 को हुए उपचुनाव के दौरान एक मतदान केंद्र पर कांग्रेस कार्यकर्ता और ढिवर गांव निवासी सीताराम सिंह की हत्या कर दी गयी थी।सीताराम की हत्या के

मामले में बाढ़ के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने पूर्व में नीतीश और दुलारचंद को छोड़कर अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लिया था।वे आरोपी जिनके खिलाफ अदालत द्वारा संज्ञान लिया गया उनमें से एक योगेंद्र यादव द्वारा इस मामले में पटना उच्च न्यायालय में यचिका दायर किए जाने पर उच्च न्यायालय ने आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी।सीताराम सिंह हत्या मामले के एक गवाह अशोक सिंह ने बाद में बाढ़ के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में एक प्रतिवाद सह शिकायत पत्र दायर कर आरोप लगाया था कि बाढ़ संसदीय उपचुनाव के दौरान 16 नवंबर वर्ष 1991 को वे सीताराम  सहित अन्य लोगों के साथ मतदान करने गये थे तभी वहां नीतीश कुमार जो कि जनता दल के उम्मीदवार थे,दुलारचंद यादव सहित अन्य लोगों के साथ पहुंचे और उन्हें वोट देने से मना किया था।अशोक सिंह ने अपने परिवाद पत्र में कहा था कि नीतीश कुमार के साथ उस समय तत्कालीन मोकामा विधायक दिलीप सिंह,दुलारचंद यादव,योगेंद्र प्रसाद और बौधु यादव थे और वे बंदूक,रायफल और पिस्तौल से लैस थे।अशोक सिंह ने अपने परिवाद पत्र में आरोप लगाया था कि इन लोगों द्वारा वोट देने से मना किये जाने पर जब सीताराम ने उनकी बात नहीं मानी तो नीतीश ने उन्हें जान से मारने की नीयत से अपनी राइफल से गोली चला दी,जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गयी।उनके साथ आये अन्य लोगों द्वारा की गयी गोलीबारी से सुरेश सिंह, मौली सिंह, मन्नू सिंह एवं रामबाबू सिंह घायल हो गये थे।अशोक सिंह के परिवाद पत्र पर बाढ़ के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रंजन कुमार ने 31 अगस्‍त 2010 को सिंह के बयान और दो गवाहों रामानंद सिंह और कैलू महतो द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर अपराध दंड संहिता 202 के अंतर्गत नीतीश और दुलारचंद यादव को अदालत के समक्ष गत नौ सितंबर को उपस्थित होने का निर्देश दिया था।बाद में नीतीश द्वारा इस मामले में पटना उच्च न्यायालय का रुख किये जाने पर न्यायालय ने बाढ़ अनुमंडल अदालत के उक्त आदेश पर रोक लगा दी थी तथा इस कांड में नीतीश से जुड़े सभी मामलों को उसके पास भेजने को कहा था।नीतीश कुमार ने 2012 के विधान परिषद सदस्य के लिए चुनाव आयोग में जो शपथ पत्र दिया है,उसमें भी इस बात की चर्चा है।

किशनगंज में आर०जे०डी० कार्यकर्ताओ ने किया एनएच-31 को जाम….

एनएच-31 पर आर०जे०डी० का नितीश कुमार एवं सुशील कुमार मोदी का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन कर किया एनएच-31 को जाम….एसडीएम मो० शफीक,एसडीपीओ कामनी बाला,सदर थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार राय आदि अधिकारी मौके पर मौजूद….आपको बताते चले की आर जे डी के वरिष्ठ नेता श्री नन्हा मुस्ताक ने कहा की बिहार की जनता के साथ नितीश कुमार ने बहुत बड़ा धोखा किया है और साम्प्रदायिक शक्त्यियों के खिलाफ जो बिहार की जनता ने मंदातेस दिया उस के साथ हाथ मिलाकर बिहार हि नहीं देश को कमज़ोर करने का जो काम किया है उसके लिए जनता इनको कभी भी माफ़ नहीं करेगी और इनको आने वाले वक्त में सबक ज़रूर सिखाएगी…।

विश्वासघात दिवस”लोकतंत्र के हत्या के विरोध में किशनगंज की जनता सड़कों पर आज किशनगंज लोकसभा युवा कांग्रेस के ओर से बिहार के करोड़ो जनता के साथ विश्वासघात करने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का स्थानीय गांधी चौक में पुतला दहन किया गया।युवा कांग्रेस के ओर आयोजित विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम का नेतृत्व युवा कांग्रेस के लोकसभा अध्यक्ष मो सरफराज खान रिंकू ने किया जब की कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी के ऊर्जावान अध्यक्ष श्री पिंटू चौधरी युवाओ के होंसला अफजाई के लिए खुद उपस्थित थे ।बाद हमलोगों ने राजद जिलाध्यक्ष एंव राजद नेता एमके रिजवी के बुलावे पर एनएच-31 के जाम कार्यक्रम में पहुंच कर अघोषित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एंव धोखेबाज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।कार्यक्रम में युवा कांग्रेस के लोकसभा उपाध्यक्ष दानिश इकबाल,जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष इमाम अली चिंटू,जुल्फिकार अहमद,उपाध्यक्ष नसीम अख्तर,अल्पसंख्यक के अध्यक्ष दारा भाई,युवा कांग्रेस के किशनगंज विधानसभा अध्यक्ष अमन रजा,महासचिव शंभु यादव,कोचाधामन अध्यक्ष अवेश अंजुम,पोठिया अध्यक्ष बदरूल आलम,मो0आमिर,युवा कांग्रेस के नेता सरफराज आलम,गुडु भाई तथा राजद के वरिष्ठ नेतागन मौजूद थे ।

फ़ाइल फोटो

वही अपने फेसबुक एकाउंट पर राजनीती के भीष्म पितामः श्री वशिष्ठ नारायण सिंह कहते है की……बिहार की राजनीतिक परिस्थितियाँ पिछले कई घंटों में बहुत ही तेजी से बदली है।राजनीतिक रूप से हाल के दिनों में जो घटनाएँ घट रहीं थी,उससे बिहार की जनता के मानस में एक अजीब सी असहजता दिखने लगी थी। जाहिर है,यह असहजता केवल जनता के स्तर पर ही नहीं बल्कि सरकार के स्तर पर भी बीते कई दिनों से दिखलाई पड़ रही थी।बदलते समय के साथ कई स्तरों पर परिमार्जन राजनीति की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।हर संगठन और संगठन के मुखिया को इस परिमार्जन को समय के साथ अपनाना पड़ता है।पार्टी के संचालन और सरकार के संचालन के तरीके अलग अलग होते हैं।पार्टी का संचालन अपने नीति,सिद्धांतों और सामयिक राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर तय होता है,जबकि सरकार का संचालन निश्चित कार्यक्रम और आपसी सामंजस्य-सहमति के आधार पर होता है।पिछले दिनों के घटनाक्रम में सहयोगी संगठनों ने इस विभेद को मिटा दिया गया था।जब भी दो या दो से अधिक दलों के बीच गठबंधन होता है,तो उस स्थिति में गठबंधन के स्वास्थ्य की सर्वाधिक ज़िम्मेदारी उसके नेता की ही होती है। गठबंधन के स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसके नेता की छवि और कौशल पर कई तरह के प्रश्नचिह्न लगने लगते हैं।जनता उसी से जबाब मांगती है।हमने तो मर्यादा को ध्यान में रखते हुए अपने सहयोगी से इस्तीफ़ा भी नहीं मांगा।हाँ, हमारी इच्छा जरूर थी कि आरोपों को लेकर बिंदुबार सफ़ाई दिया जाय।चूँकि यह जनमानस की मांग थी।लेकिन ऐसा न होते देख नीतीशजी स्वयं इस्तीफा देकर भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात को स्थापित करने का कार्य किया।यह उनके अंतर्मन की आवाज थी।जब नेता के पोजीशन और अथॉरिटी को ही गठबंधन के सहयोगी द्वारा चुनौती मिलने लगे। जब सार्वजनिक मंचों पर नेता को लेकर अभद्र भाषा का प्रयोग होने लगे,तो ऐसी स्थिति में सरकार की कार्य शैली में कई तरह के उलझाव दिखाई पड़ने लगते हैं। बीते कई दिनों से सरकार की ऊर्जा गठबंधन के साथियों की जिद्द के सामने विवश थी। एक ओर भ्रष्टाचार के नए-पुराने कई मामले खुल रहे थे ,वही दूसरी ओर सुशासन,विकास और न्याय की व्यापक परिकल्पना थी। भारी अंतर्विरोध और खींचा तानी के बाद की परिणति आज आपके सामने है।हमने पहले भी कहा था और आज भी कह रहे हैं कि नीतीश कुमार छवि और प्रतिष्ठा के साथ समझौता नहीं करते। हमारे लिए बिहार की तरक्की और जनता की मांग प्राथमिक है। हम ऐसा महसूस करने लगे थे कि विकास की गति मंथर पड़ने लगी है। अपराधियों को शह मिलने लगा है।नीतीशजी की जो भी छवि आज तक बन पायी है,उसमें उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राजनीति के साथ जनजागृति और समाज सुधार उनके लिए आवश्यक मानदंड हैं। इन्हीं भूमिकाओं के बदौलत आज उसका हासिल है- राष्ट्रिय स्तर पर उनकी प्रसिद्धि और सम्मान। नीतीशजी की कार्य शैली का अहम हिस्सा है- गुड गवर्नेंस और विकास। और इन्हीं प्रतिमानों के साथ हम आज से फिर आगे बढ़ेंगे। आज भारी भरकम सिद्धांतों के वनिस्पत रोटी-कपड़ा और मकान की समस्या प्राथमिक है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस जंग को हमने वर्षों पहले शुरू किया था,उसके साथ किसी भी तरह से समझौता जनता के साथ धोखा है।राजनीति यदि चारदीवार के बीच घिरी रहती है तो नीचे की ओर ही जाती है । राजनीति यदि सेवा और विकास से जुड़कर अपना सामंजस्य बिठाती है तो वह इतिहास का हिस्सा बन जाती है। साथ ही साथ जनमानस पर भी सकारात्मक प्रभाव छोडती है।रजीनीतिक जीवन में रहने वाले लोगों से जनता शुचिता और नैतिकता की अपेक्षा तो करती ही है।राज्य के हित में कभी कभी नेता को कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। हमें सरकार चलाने में कई स्तरों पर दिक्कतें आ रही थी। हम असहज और विवश होने लगे थे। यदि सरकार की भूमिका ही कारगर और प्रभावी नहीं बची थी,तो ऐसे में सरकार चलाने का हमारे लिए कोई मतलब नहीं था।आज की परिस्थिति में मुख्य चुनौती यह है कि हम बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर कैसे समृद्ध और सशक्त बनाएँ? कैसे उसके विकास की गति को तेज करें? कैसे जनता की आँखों की चमक को हासिल करें ? आज नीतीश जी ने नए मित्र के साथ पुनः सरकार चलाने की ज़िम्मेदारी उठाई है।उम्मीद करते हैं बिहार फिर से नई अंगराई लेगा…..वशिष्ठ नारायण सिंह…….

जिसे आने वाला वक्त बिहार की जनता मुहतोड़ जबाब देगी……किशनगंज में AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर प्रहार कर कहा की मुख्यमंत्री को याद करना चाहिए,जब उन्हें बिहार की जनता उनका कार्यक्रम का विरोध करते थे,और काला झंडा दिखाकर प्रदर्शन करते थे…अख्तरुल इमान ने दावा किया है की जिस प्रकार जनता को उन्होंने धोखा दिया है,सीएम नीतीश कुमार सीमांचल के क्षेत्र में कही कदम तक नहीं रख पाएंगे…

वही अपने फेसबुक एकाउंट पर लालू प्रसाद यादव ने पोस्ट किया (01.08.2017 20:00pm) की मास बेस की बात करने वाले नीतीश कुमार ने अपनी अलग राह पकड़ने की शुरुआत ही अपनी जातीय रैली “कुर्मी चेतना रैली” से ही की थी। हिम्मत है तो इसे नकारें, मैंने तो अपने जीवन में मैंने कभी किसी यादव रैली में भाग नहीं लिया। इस अवसरवादी व्यक्ति ने मंडल के दौर में भी भाजपाईयो और आरएसएस के इशारे पर अलग राह पकड़कर ओबीसी एकता और विशेषकर बिहार में दलितों और पिछड़ों की गोलबंदी को रोकने का प्रयास किया था। यह उस वक़्त सामाजिक न्याय के रथ को रोकना चाहता था। नीतीश कुमार बताओ मंडल कमीशन लागू करवाने में तुम्हारा क्या रोल था ? हमने और शरद यादव जी ने इसके लिए संघर्ष किया और मंडल कमीशन लागू करवाने के लिए क्या-क्या किया तुम क्या जानते हो ? मुझे कहता है मेरा मास बेस नहीं है, अरे मेरे मास बेस से परेशान और अतिमहत्वाकांक्षी होने के कारण ही तुम मंडल छोड़ कमंडल थाम लिए थे। बात करता है

रिपोर्ट-धर्मेन्द्र सिंह 

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