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द्देश्यों को पूरा करने के लिए चीन कर रहा है जोर-जबरदस्ती: सीअाईए

अमेरिका खुफिया एजेंसी (सीअाईए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने उद्दश्यों को हासिल करने के लिए चीन तेजी से बलपूर्वक,हठधर्मी तरीके अपना रहा है जैसा कि विवादित दक्षिण चीन सागर में देखा गया है।अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सीअाईए के पूर्वी एशिया मिशन सेंटर के उप सहायक निदेशक माइकल कोलिंस ने यह टिप्पणी की है।इससे पहले अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने बताया था कि ईस्ट चाइना सी में रविवार को चीन के 2 लड़ाकू विमानों ने यूएस नौसेना के एक टोही विमान का पीछा किया और फिर खतरनाक तरीके से उसके बेहद करीब आ गया।पेंटागन का कहना है कि जिस समय यह घटना हुई,उस समय अमेरिकी विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई सीमा में था।सोमवार को पेंटागन द्वारा दिए गए इस बयान के बाद कोलिंस ने चीन की आक्रामकता और जोर-जबर्दस्ती दिखाने वाली रणनीति पर टिप्पणी की।बतादें कि पूर्वी चीन के ऊपर दो चीनी विमानों और एक अमेरिकी टोही में टक्कर होते-होते बची।अमेरिकी नौसेना का टोही विमान पूर्वी चीन सागर के ऊपर पहुंचा तो दो चीनी लड़ाकू विमानों ने उसे घेर लिया।जिसके बाद आसमान में इनकी टक्कर होते-होते बची।जिस वक्त ये तीनों विमान आसमान में थे तो एक बार तो चीन के जे-10 विमान की अमेरिका के EP-3 विमान से मजह 300 फीट (91 मीटर) की दूरी रह गयी थी,जिस वजह से पायलट को अपना रास्ता बदलना पड़ा।इस घटना के बाद चीन और अमेरिका द्वारा अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं।एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया चीनी विमान मिसाइल से लैस थे।एस्पेन इंस्टिट्यूट के सुरक्षा फोरम में बोलते हुए कोलिंस ने कहा,’चीन अपना मकसद पूरा करने के लिए जोर-जबर्दस्ती कर रहा है और हठधर्मी तरीके अपना रहा है।हमें ध्यान में रखना होगा कि उत्तर कोरिया,दक्षिण चीन सागर और व्यापार जैसे मुद्दों पर चीन की रणनीति क्या है।बहरहाल,उन्होंने कहा कि चीन के व्यवहार का यह मतलब नहीं है कि अमेरिका और चीन इस क्षेत्र में युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं।कोलिंस ने कहा,वे पूर्वी एशिया में पलटवार नहीं चाहते तथा उन्हें अपने देश को आगे ले जाने के लिए आर्थिक जरुरतों तथा तकनीक के लिए अमेरिका एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ स्थिर,मजबूत संबंधों की जरुरत है।कोलिंस ने तो डोकलाम सेक्टर में जारी भारत और चीन के मौजूदा गतिरोध पर कोई टिप्पणी नहीं की,लेकिन अमेरिका में तैनात जापान के राजदूत केनिचिरो सासा ने भारत का जिक्र जरूर किया।भारत के साथ अपने मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,’इन दिनों हम अपने कुछ सहयोगी और मित्र देशों के साथ मिलकर एक साझा नेटवर्क विकसित कर रहे हैं।भारत भी इनमें शामिल है।जापानी राजदूत ने कहा,’चीन की महत्वाकांक्षा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में केवल अमेरिका से बराबरी करने तक ही सीमित नहीं है।चीन की आक्रामकता केवल उसकी आर्थिक महत्वकांक्षा नहीं,बल्कि कूटनीतिक महत्वकांक्षा है।चीन अमेरिका के साथ मुकाबला करना चाहता है।गौरतलब है कि बीते तीन महीनों में ये तीसरा मौका है,जब चीन और अमेरिका के विमानों में इस तरह का टकराव देखने को मिला है।इसी साल 17 और 25 मई को चीनी विमानों ने अमेरिकी विमान को घेरने की कोशिश की थी।एक लड़ाकू विमान बहुत ही तेज गति से अमेरिकी विमान के करीब आ गया,जिस वजह से पायलट को अपना रास्ता बदलना पड़ा था।

रिपोर्ट-दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार की रिपोर्ट 

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