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डीआईजी विकाश वैभव ने किया 4 सिपाही एवं एक एसआई को सस्पेंड कर विभागीय जांच का आदेश…

एसआई राजाराम सिंह को भी बर्खास्त करने की अनुशंसा की गई।जिसे डीआइजी विकास वैभव ने हरी झंडी दे दी।यानि मंजूरी दे दी।वहीं आपको बता दें कि जिला पुलिस विभाग में इतनी बड़ी करवाई से अन्य पुलिसकर्मी में हड़कंप मच गया है।

भागलपुर पुलिस जितनी तेज-तर्रार मानी जाती है।पिछले कुछ समय से अपनी जिम्मेदारी का नाजायज फायदा भी उठाते थे।वर्दी का रौब दिखाकर अवैध वसूली करते थे।परंतु जब से भागलपुर प्रक्षेत्र सहित मुंगेर के डीआईजी विकास वैभव बने हैं।तब से दोषी पुलिसकर्मी को नियमानुसार सजा देने में कोई कोताही नहीं बरती जाती है।ऐसा ही एक मामला उनके संज्ञान में गया था।जिसकी जांच के आदेश दिए गए थे।जांच पूरी होते ही सभी दोषियों को बर्खास्त कर दिया गया 15 जून 2017 को एक वीडियो वायरल हुआ था।जिसमें ये दिख रहा था कि अंग नगरी को उत्तर दिशा से जोड़ने वाली विक्रमशिला सेतु के टॉल टैक्स बैरियर पर कुछ पुलिसकर्मी अवैध वसूली कर रहे थे।इस वीडियो के वायरल होते ही जहां डीआइजी विकास वैभव ने जांच के आदेश दिए।वहीं एसएसपी ने तत्काल अवैध वसूली कर रहे 4 सिपाही एवं एक एसआई को सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू किया गया था।इस जांच की जिम्मेदारी डीएसपी मुख्यालय रमेश कुमार को दी गई थी।जांचोपरांत सभी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए।जिसकी रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी गई। दोषियों में सिपाही कुंदन कुमार,ओमप्रकाश साह,रंजीत कुमार और मोहम्मद रज्जाक थे।जिन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।वहीं इसी मामले में एसआई राजाराम सिंह को भी बर्खास्त करने की अनुशंसा की गई।जिसे डीआइजी विकास वैभव ने हरी झंडी दे दी।यानि मंजूरी दे दी।वहीं आपको बता दें कि जिला पुलिस विभाग में इतनी बड़ी करवाई से अन्य पुलिसकर्मी में हड़कंप मच गया है।चारों ओर इस करवाई की चर्चा जोर से हो रही है।आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में भी शराब मामले में 4 सिपाही व एक एसआई बर्खास्त हो चुके हैं।यानि पिछले 3 महीनों में 10 भ्रष्ट पुलिसकर्मी बर्खास्त हो चुके हैं।

रिपोर्ट-धर्मेन्द्र सिंह 

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