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अमरनाथ यात्री अमरनाथ दर्शन के लिए यात्री पथरीले रास्तों से होकर गुजरते हैं राज्य पुलिस के क़रीब 14 हज़ार जवानों को तैनात सेना की दो बटालियनों के अलावा सीआरपीएफ़ और बीएसएफ़ की 100 टुकड़ियों को तैनात किया….

अमरनाथ धाम साल में सिर्फ एक बार श्रद्धालुओं के लिए खुलता है।दर्शन के लिए हर साल देशभर से लाखों भक्त यहां पहुंचते हैं।कश्मीर की खूबसूरत वादियों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा बेदह खतरनाक मानी जाती है।सोमवार रात अनंतनाग में श्रद्धालुओं की बस पर हुए आतंकी हमले के बाद अमरनाथ के रास्ते पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।हिंदुओं की इस धार्मिक यात्रा में अनंतनाग के पहलगाम इलाके की एक तस्वीर।इस साल अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था यहीं से रवाना किया गया था।बैरे मार्ग पर खतरनाक पुल से होकर 

गुजरते अमरनाथ यात्री अमरनाथ दर्शन के लिए यात्री पथरीले रास्तों से होकर गुजरते हैं।कुछ यात्री पैदल चलकर गुफा तक पहुंचते हैं,वहीं ज्यादातर यात्री घोड़ों और पालकी की मदद से यात्रा पूरी करते हैं।यात्रियों की सुरक्षा के लिए अमरनाथ के रास्ते पर हजारों जवानों की तैनाती की जाती है।कश्मीर की खूबसूरत वादियों से होकर गुजरती है अमरनाथ यात्रा।गुफा तक पहुंचने के लिए यात्रियों को खतरनाक पहाड़ियों को पार करना होता है।कड़ी सुरक्षा के बीच पालकी में सवार होकर गुफा तक जाते यात्री।चालीस दिन चलने 

वाली वाषिर्क पवित्र अमरनाथ यात्रा इस साल 29 जून से शुरू  है।पिछले साल अमरनाथ यात्रा 10 दिन कम यानी केवल 48 दिनों तक ही चली थी।एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा,‘तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) ने निर्णय लिया है कि यात्रा 29 जून से शुरू है और सात अगस्त को श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी।जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एवं एसएएसबी के अध्यक्ष एनएन वोहरा ने नई दिल्ली में श्राइन बोर्ड की 32वीं बैठक की अध्यक्षता की।पवित्र अमरनाथ गुफा के लिए तीर्थयात्रा की खातिर यात्रियों को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है।यह पंजीकरण बालटाल और चंदनवाड़ी दोनों मार्गों से अमरनाथ गुफा जाने के लिए तय बैंकों की शाखाओं और डाकघरों के माध्यम से होता है,जिसकी अधिसूचना श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड जारी करती है।वाषिर्क अमरनाथ यात्रा के क्रम में पारंपरिक पूजा अर्चना के लिए भगवान शिव की छड़ी मुबारक को श्रीनगर  हरी पर्वत पर स्थित प्राचीन शरिका भवानी मंदिर भी ले जाया जाता है।इस यात्रा का समापन पवित्र गुफा में छड़ी मुबारक के पहुंचने के साथ होता है।उल्लेखनीय है कि गत वर्ष कश्मीर में जारी अशांति के चलते पिछले वाषिर्क अमरनाथ यात्रा कई बार निलंबित कर दी गई थी।

अमरनाथ यात्रियों पर चरमपंथियों के हमले के बाद इस यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।15 साल के बाद चरमपंथियों ने अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाया है।अमरनाथ यात्रा की क्या अहमियत है और इसको लेकर किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था की जाती है,अमरनाथ यात्रा से जुड़ी हर बात एक नज़र में…
क्या है सुरक्षा व्यवस्था हालांकि भारत प्रशासित कश्मीर में मौजूदा तनाव को देखते हुए इस साल इस यात्रा में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।इस यात्रा की शुरुआत से पहले सुरक्षा बलों ने मीडिया को जो जानकारी दी थी उसके मुताबिक 300 किलोमीटर लंबे रूट के लिए सेना,पैरामिलिट्री फ़ोर्स और राज्य पुलिस के क़रीब 14 हज़ार जवानों को तैनात किया गया है।सेना की दो बटालियनों के अलावा सीआरपीएफ़ और बीएसएफ़ की 100 टुकड़ियों को तैनात किया गया है।यह संख्या पिछले साल अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा कर रहे जवानों की तुलना में दोगुनी है।कश्मीर में मौजूदा तनाव को देखते हुए सुरक्षा बलों को किसी चरमपंथी हमले की आशंका पहले से थी,लिहाजा इस बार ज़्यादा सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक तकनीकों से भी लैस किया गया था।अलग से बटालियनों को कवर अप के लिए भी तैनात रखा गया।अमरनाथ यात्रा दरअसल हिंदुओं के लिए पवित्र अमरनाथ गुफा तक की यात्रा है। यह गुफा समुद्र तल से 3,888 मीटर यानी 12,756 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है।यहां तक केवल पैदल या खच्चर के ज़रिए ही पहुंचा जा सकता है।दक्षिण कश्मीर के पहलगाम से ये दूरी क़रीब 46 किलोमीटर की है,जिसे पैदल पूरा करना होता है।इसमें अमूमन पांच दिन तक का वक्त लगता है।एक दूसरा रास्ता सोनमर्ग के बालटाल से भी है,जिससे अमरनाथ गुफा की दूरी महज 16 किलोमीटर है।लेकिन मुश्किल चढ़ाई होने के ये रास्ता बेहद कठिन माना जाता है।ये गुफा बर्फ़ से ढंकी रहती है लेकिन गर्मियों में थोड़े वक्त के लिए जब गुफा के बाहर बर्फ़ मौजूद नहीं होती,उस वक्त में तीर्थयात्री यहां पुहंच सकते हैं।श्रावण के महीने में ये यात्रा शुरू होती है।इन दिनों 45 दिनों 
तक तीर्थयात्री यहां आ सकते हैं।हालांकि यात्रा की शुरुआत कब हुई इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।इस यात्रा के लिए आने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखकर ही 2000 में अमरनाथ श्राइन बोर्ड का गठन किया गया जो राज्य सरकार से  मिलकर इस यात्रा आयोजन को कामयाब बनाता है।किवंदती ये है कि इस गुफ़ा में शिव ने अपने अस्तित्व और अमरत्व के रहस्य के बारे में पार्वती को बताया था।इस गुफा का जिक्र कश्मीरी इतिहासकार कल्हण की 12वीं सदी में रचलित महाकाव्य राजतरंगिणी में भी है।हालांकि इसके बाद लंबे समय तक इस गुफा से जुड़ी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।इस गुफा की छत से बूंद बूंद पानी टपकता है जो फ्रीजिंग प्वाइंट पर जमते हुए एक विशालकाय कोन के आकार की आकृति बनाता है जिसे हिंदू शिवलिंग का रूप मानते हैं।जून से 
 
अगस्त के बीच इस आकृति का आकार थोड़ा छोटा हो जाता है।शिवलिंग के साथ गणेश और पार्वती की बर्फ़ से बनी मूरत भी नज़र आती है।इसके दर्शन के लिए हर साल लाखों हिंदू अमरनाथ यात्रा के लिए अपना पंजीयन कराते हैं।सोमवार की रात को हुए चरमपंथी हमले से पहले भी अमरनाथ यात्रियों पर हमले हुए हैं।इस हमले से पहले 2 अगस्त, 2000 को चरमपंथियों ने पहलगाम के बेस कैंप में पर हमला किया था।बेस कैंप में 32 लोग मारे गए थे,जिसमें 21 अमरनाथ यात्री थे।इसके बाद अगले साल 20 जुलाई, 2001 को अमरनाथ गुफा के रास्ते की सबसे ऊंचाई पर स्थित पड़ाव शेषनाग पर हमला हुआ,जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी,जिनमें तीन महिलाएं और दो पुलिस अधिकारी शामिल थे।इन हमलों को देखते हुए 2002 में अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल के 15 हज़ार जवानों को तैनात किया गया।बावजूद इसके, 6 अगस्त, 2002 को चरमपंथियों ने पहलगाम में हमला किया जिसमें नौ लोगों की मौत हुई थी और 30 अन्य लोग घायल हो गए थे।
 
रिपोर्ट-…..न्यूज़ रिपोटर 

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